उद्योग पर्व  अध्याय ७६

अर्जुन उवाच

न स नार्हति दुष्टात्मा वधं ससुतवान्धवः |  १२   क
येन धर्मसुते दृष्ट्वा न सा श्रीरुपमर्षिता ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति