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उद्योग पर्व
अध्याय ७६
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अर्जुन उवाच
अधर्मेण जितान्दृष्ट्वा वने प्रव्रजितांस्तथा |  १५   क
वध्यतां मम वार्ष्णेय़ निर्गतोऽसौ सुय़ोधनः ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति