उद्योग पर्व  अध्याय ७६

अर्जुन उवाच

सम्पाद्यमानं सम्यक्च स्यात्कर्म सफलं प्रभो |  ६   क
स तथा कृष्ण वर्तस्व यथा शर्म भवेत्परैः ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति