आदि पर्व  अध्याय ७७

वैशम्पाय़न उवाच

राज्ञा पुत्रफलं देय़मिति मे निश्चिता मतिः |  ९   क
अपीदानीं स धर्मात्मा इय़ान्मे दर्शनं रहः ||  ९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति