वन पर्व  अध्याय ७७

वृहदश्व उवाच

स मासमुष्य कौन्तेय़ भीममामन्त्र्य नैषधः |  १   क
पुरादल्पपरीवारो जगाम निषधान्प्रति ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति