वन पर्व  अध्याय ७७

वृहदश्व उवाच

नैषधेनैवमुक्तस्तु पुष्करः प्रहसन्निव |  ११   क
ध्रुवमात्मजय़ं मत्वा प्रत्याह पृथिवीपतिम् ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति