menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय ४
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्योर्विनाशेन न शर्म लभतेऽर्जुनः |  १२   क
स कथं मद्धिते यत्नं प्रकरिष्यति याचितः ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति