वन पर्व  अध्याय ७७

वृहदश्व उवाच

प्रस्थाप्य पुष्करं राजा वित्तवन्तमनामय़म् |  २९   क
प्रविवेश पुरं श्रीमानत्यर्थमुपशोभितम् |  २९   ख
प्रविश्य सान्त्वय़ामास पौरांश्च निषधाधिपः ||  २९   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति