उद्योग पर्व  अध्याय ७७

भगवानु उवाच

मम चापि स वध्यो वै जगतश्चापि भारत |  १२   क
येन कौमारके यूय़ं सर्वे विप्रकृतास्तथा ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति