उद्योग पर्व  अध्याय ७७

भगवानु उवाच

क्षेत्रं हि रसवच्छुद्धं कर्षकेणोपपादितम् |  २   क
ऋते वर्षं न कौन्तेय़ जातु निर्वर्तय़ेत्फलम् ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति