द्रोण पर्व  अध्याय ७७

वासुदेव उवाच

सोऽय़ं प्राप्तस्तवाक्षेपं पश्य साफल्यमात्मनः |  ६   क
कथं हि राजा राज्यार्थी त्वय़ा गच्छेत संय़ुगम् ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति