आदि पर्व  अध्याय ७८

वैशम्पाय़न उवाच

कस्यैते दारका राजन्देवपुत्रोपमाः शुभाः |  १३   क
वर्चसा रूपतश्चैव सदृशा मे मतास्तव ||  १३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति