शान्ति पर्व  अध्याय ७८

राजो उवाच

पूजिताः संविभक्ताश्च मृदवः सत्यवादिनः |  १२   क
व्राह्मणा मे स्वकर्मस्था मामकान्तरमाविशः ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति