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विराट पर्व
अध्याय २९
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वैशम्पाय़न उवाच
तं वशे न्याय़तः कृत्वा सुखं वत्स्यामहे वय़म् |  १३   क
भवतो वलवृद्धिश्च भविष्यति न संशय़ः ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति