वन पर्व  अध्याय ७८

वृहदश्व उवाच

दमय़न्तीमपि पिता सत्कृत्य परवीरहा |  २   क
प्रस्थापय़दमेय़ात्मा भीमो भीमपराक्रमः ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति