वन पर्व  अध्याय ७८

वृहदश्व उवाच

दुःखमेतादृशं प्राप्तो नलः परपुरञ्जय़ः |  ६   क
देवनेन नरश्रेष्ठ सभार्यो भरतर्षभ ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति