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उद्योग पर्व
अध्याय ७८
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नकुल उवाच
अस्माकमपि वार्ष्णेय़ वने विचरतां तदा |  ८   क
न तथा प्रणय़ो राज्ये यथा सम्प्रति वर्तते ||  ८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति