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द्रोण पर्व
अध्याय ७८
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अर्जुन उवाच
जानंस्त्वमपि वै कृष्ण मां विमोहय़से कथम् |  १४   क
यद्वृत्तं त्रिषु लोकेषु यच्च केशव वर्तते ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति