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द्रोण पर्व
अध्याय ७८
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अर्जुन उवाच
पश्य वाह्वोश्च मे वीर्यं धनुषश्च जनार्दन |  १८   क
पराजय़िष्ये कौरव्यं कवचेनापि रक्षितम् ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति