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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५०
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व्रह्मो उवाच
प्रसादेनैव सत्त्वस्य प्रसादं समवाप्नुय़ात् |  ३५   क
लक्षणं हि प्रसादस्य यथा स्यात्स्वप्नदर्शनम् ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति