वन पर्व  अध्याय ७९

वैशम्पाय़न उवाच

नीलाम्वुदसमप्रख्यं मत्तमातङ्गविक्रमम् |  १४   क
तमृते पुण्डरीकाक्षं काम्यकं नातिभाति मे ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति