वन पर्व  अध्याय ५२

वृहदश्व उवाच

कथमागमनं चेह कथं चासि न लक्षितः |  २०   क
सुरक्षितं हि मे वेश्म राजा चैवोग्रशासनः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति