आदि पर्व  अध्याय ८

सूत उवाच

स चापि च्यवनो व्रह्मन्भार्गवोऽजनय़त्सुतम् |  १   क
सुकन्याय़ां महात्मानं प्रमतिं दीप्ततेजसम् ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति