आदि पर्व  अध्याय ५५

वैशम्पाय़न उवाच

अतर्पय़च्च कौन्तेय़ः खाण्डवे हव्यवाहनम् |  ३५   क
वीभत्सुर्वासुदेवेन सहितो नृपसत्तम ||  ३५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति