शान्ति पर्व  अध्याय ८

वैशम्पाय़न उवाच

अधनेनार्थकामेन नार्थः शक्यो विवित्सता |  २०   क
अर्थैरर्था निवध्यन्ते गजैरिव महागजाः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति