अनुशासन पर्व  अध्याय ८

भीष्म उवाच

न मे त्वत्तः प्रिय़तरो लोकेऽस्मिन्पाण्डुनन्दन |  १२   क
त्वत्तश्च मे प्रिय़तरा व्राह्मणा भरतर्षभ ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति