अनुशासन पर्व  अध्याय ८

भीष्म उवाच

पितेव पुत्रान्रक्षेथा व्राह्मणान्व्रह्मतेजसः |  २८   क
गृहे चैषामवेक्षेथाः कच्चिदस्तीह जीवनम् ||  २८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति