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भीष्म पर्व
अध्याय ९९
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सञ्जय़ उवाच
तथैव च रथान्राजन्संममर्द रणे गजः |  ३१   क
रथश्चैव समासाद्य पदातिं तुरगं तथा ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति