आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ८

संवर्त उवाच

उमासहाय़ो भगवान्यत्र नित्यं महेश्वरः |  ३   क
आस्ते शूली महातेजा नानाभूतगणावृतः ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति