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मौसल पर्व
अध्याय ८
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वैशम्पाय़न उवाच
अलुप्तधर्मस्तं धर्मं कारय़ित्वा स फल्गुनः |  २८   क
जगाम वृष्णय़ो यत्र विनष्टा भरतर्षभ ||  २८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति