मौसल पर्व  अध्याय ८

वैशम्पाय़न उवाच

सर्वथा वृष्णिदारांस्तु वालवृद्धांस्तथैव च |  ५   क
नय़िष्ये परिगृह्याहमिन्द्रप्रस्थमरिन्दम ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति