मौसल पर्व  अध्याय ८

वैशम्पाय़न उवाच

निवर्तध्वमधर्मज्ञा यदि स्थ न मुमूर्षवः |  ५०   क
नेदानीं शरनिर्भिन्नाः शोचध्वं निहता मय़ा ||  ५०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति