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मौसल पर्व
अध्याय ८
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वैशम्पाय़न उवाच
प्रेक्षतस्त्वेव पार्थस्य वृष्ण्यन्धकवरस्त्रिय़ः |  ६१   क
जग्मुरादाय़ ते म्लेच्छाः समन्ताज्जनमेजय़ ||  ६१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति