मौसल पर्व  अध्याय ८

वैशम्पाय़न उवाच

रुक्मिणी त्वथ गान्धारी शैव्या हैमवतीत्यपि |  ७१   क
देवी जाम्ववती चैव विविशुर्जातवेदसम् ||  ७१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति