सभा पर्व  अध्याय ८

नारद उवाच

तैजसी सा सभा राजन्वभूव शतय़ोजना |  २   क
विस्ताराय़ामसम्पन्ना भूय़सी चापि पाण्डव ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति