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वन पर्व
अध्याय ८
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वैशम्पाय़न उवाच
प्रिय़ं सर्वे चिकीर्षामो राज्ञः किङ्करपाणय़ः |  १६   क
न चास्य शक्नुमः सर्वे प्रिय़े स्थातुमतन्द्रिताः ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति