सभा पर्व  अध्याय ५

नारद उवाच

कच्चिच्छृणोषि वृद्धानां धर्मार्थसहिता गिरः |  १०५   क
नित्यमर्थविदां तात तथा धर्मानुदर्शिनाम् ||  १०५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति