विराट पर्व  अध्याय ८

द्रौपद्यु उवाच

तत्र तत्र चराम्येवं लभमाना सुशोभनम् |  १८   क
वासांसि यावच्च लभे तावत्तावद्रमे तथा ||  १८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति