शल्य पर्व  अध्याय ३५

वैशम्पाय़न उवाच

स तु दीर्घेण कालेन तेषां प्रीतिमवाप्य च |  १०   क
जगाम भगवान्स्थानमनुरूपमिवात्मनः ||  १०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति