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द्रोण पर्व
अध्याय ८
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धृतराष्ट्र उवाच
यस्य कर्मानुजीवन्ति लोके सर्वधनुर्भृतः |  ३१   क
स सत्यसन्धः सुकृती श्रीकामैर्निहतः कथम् ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति