अनुशासन पर्व  अध्याय १३४

महेश्वर उवाच

दक्षे शमदमोपेते निर्ममे धर्मचारिणि |  २   क
पृच्छामि त्वां वरारोहे पृष्टा वद ममेप्सितम् ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति