कर्ण पर्व  अध्याय ८

सञ्जय़ उवाच

स शरौघार्दितो नागो भीमसेनेन संय़ुगे |  ३७   क
निगृह्यमाणो नातिष्ठद्वातध्वस्त इवाम्वुदः ||  ३७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति