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शान्ति पर्व
अध्याय ८०
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भीष्म उवाच
इत्येवं धर्मतः ख्यातमृषिभिर्धर्मवादिभिः |  १४   क
पुमान्यज्ञश्च सोमश्च न्याय़वृत्तो यथा भवेत् |  १४   ख
अन्याय़वृत्तः पुरुषो न परस्य न चात्मनः ||  १४   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति