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अनुशासन पर्व
अध्याय ८०
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व्यास उवाच
पूर्वमासन्नशृङ्गा वै गाव इत्यनुशुश्रुमः |  १३   क
शृङ्गार्थे समुपासन्त ताः किल प्रभुमव्ययम् ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति