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शान्ति पर्व
अध्याय २५३
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भीष्म उवाच
सम्भाव्य चटकान्मूर्ध्नि जाजलिर्जपतां वरः |  ४१   क
आस्फोटय़त्तदाकाशे धर्मः प्राप्तो मय़ेति वै ||  ४१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति