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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८०
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वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणाः कुरुमुख्यस्य प्रय़ुक्ता हय़सारिणः |  ९   क
कुर्वन्तु शान्तिकां त्वद्य रणे योऽय़ं मय़ा हतः ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति