menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय ८०
chevron_left
chevron_right
पुलस्त्य उवाच
गिरिमुञ्जं समासाद्य त्रिषु लोकेषु विश्रुतम् |  १०२   क
पितामहं नमस्कृत्य गोसहस्रफलं लभेत् ||  १०२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति