menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय ८०
chevron_left
chevron_right
पुलस्त्य उवाच
तत्र स्नात्वा नरव्याघ्र विन्देद्वहु सुवर्णकम् |  १३२   क
सर्वपापविशुद्धात्मा व्रह्मलोकं च गच्छति ||  १३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति