वन पर्व  अध्याय ८०

नारद उवाच

स पितॄंस्तर्पय़ामास देवांश्च परमद्युतिः |  १४   क
ऋषींश्च तोषय़ामास विधिदृष्टेन कर्मणा ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति