वन पर्व  अध्याय ८०

पुलस्त्य उवाच

अनेन तव धर्मज्ञ प्रश्रय़ेण दमेन च |  २२   क
सत्येन च महाभाग तुष्टोऽस्मि तव सर्वशः ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति